Tuesday, July 7, 2020

यूजीसी परीक्षा दिशानिर्देश अनुचित, छात्रों में पैदा करेगा भ्रम।

स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) दक्षिण महाराष्ट्र का बयान

 यूजीसी परीक्षा दिशानिर्देश अनुचित, छात्रों में पैदा करेगा भ्रम।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा परीक्षाओं और शैक्षणिक कैलेंडर पर जारी किए गए संशोधित दिशानिर्देश छात्रों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए निराधार,व्यर्थ एवं अन्यायपूर्ण हैं। दिशानिर्देश छात्रों के बीच भ्रम और चिंता को बढ़ाएगा और विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर को बिगड़ेगा, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को पैदा करेगा और शिक्षकों और कॉलेजों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा। 

यूजीसी ने इससे पूर्व अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को आयोजित करने के लिए जुलाई की समय सीमा निर्धारित की थी, जिसका पालन देश के अधिकांश हिस्सों में कॉलेजों के लिए COVID-19 संकट के कारण असंभव था। अपनी गलती का एहसास होने के बाद, आयोग ने समय से समय सीमा को सितंबर तक बढ़ा दिया है। हालांकि यह समय सीमा भी अनुचित है क्योंकि प्रकोप की स्थिति अनिश्चित और अप्रत्याशित बनी हुई है। इसके अलावा, मौजूदा शैक्षणिक वर्ष को सितंबर तक बढ़ाने का आदेश देश भर के विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

ऑनलाइन, ऑफलाइन या मिश्रित मोड में परीक्षा आयोजित करने का आयोग का सुझाव जमीनी हकीकत से अलग है। केंद्र द्वारा प्रदान की गई ढील के बावजूद, देश के कई हिस्सों में राज्य और स्थानीय सरकारों द्वारा लगाए गए कड़े लॉकडाउन जारी हैं, जिसके कारण ऑफ़लाइन परीक्षाएं असंभव और यहां तक ​​कि अवांछनीय भी हैं। कई कॉलेज, विशेष रूप से देश के दूरदराज के हिस्सों में स्थित शिक्षण संस्थानों में ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का अभाव है। विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में छात्रों के पास इंटरनेट या डिजिटल उपकरण नहीं हैं। ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने पर इन छात्रों को नुकसान होगा।

शैक्षणिक कार्यक्रमों की विविधता, उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों की बड़ी मात्रा और विभिन्न राज्यों में शिक्षा को नियंत्रित करने वाले कानूनों और मानदंडों के विभिन्न सेट को ध्यान में रखते हुए यह बात कही जा सकती है कि किसी केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा विशिष्ट दिशानिर्देशों का एक सामान्य सेट जारी करने से फायदा काम और नुकसान ज़्यादा होगा। इसके बजाय, राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को स्थिति पर विचार करके अकादमिक मामलों पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र छोड़ देना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यूजीसी और केंद्र की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करने की जिद, जबकि इंटरमीडिएट के छात्रों को बिना परीक्षा के पास कर देना और अगली कक्षाओं में बढ़ा देना, क्रेडिट-आधारित सेमेस्टर और ग्रेडिंग सिस्टम (सीबीएसजीएस) के बिल्कुल विपरीत है। यह मूल्यांकन प्रणाली न केवल अंतिम  बल्कि पाठ्यक्रम के सभी सेमेस्टर के छात्रों के प्रदर्शन पर समान जोर देती है। छात्रों को ना केवल वर्ष के अंत की थ्योरी परीक्षा बल्कि टेस्ट, प्रायोगिक परीक्षा, प्रोजेक्ट कार्य और निरंतर मूल्यांकन के विभिन्न उपकरणों द्वारा भी मूल्यांकित किया जाता है। इस संदर्भ में अन्य परीक्षणों की तुलना में अंतिम-सेमेस्टर की सैद्धांतिक परीक्षा को अनावश्यक तौर पर अधिक महत्व देना न्यायसंगत नहीं है।

मुहम्मद सलमान
अध्यक्ष, SIO दक्षिण महाराष्ट्र
7208656094
mahsouth@sio-india.org

Thursday, April 30, 2020

AICTE appealed to teachers, promoting Hindutva..

All India Council for Technical Education (AICTE) today sent this message to all the teachers at technical education institutes across the country, urging them to participate in group prayers organised by Indian Yoga Association as part of their 'Shankara Jayanti' celebrations, ostensibly to 'deal with Coronavirus crisis'!

It's shameful that at a time when the central government should be focussed on providing necessary healthcare and food security to people affected by the Covid-19 pandemic and lockdown, it's busy promoting prayers and practices of a particular religion. AICTE is a regulatory body whose mandate is to set standards for technical education institutes and facilitate them, not organise prayer meets. This is a dangerous attempt by the central government to weaken autonomous bodies such as AICTE by using them to further its Hindutva agenda. 

Uzair Ahmed Rangrez
Secretary
Students Islamic Organisation of India (SIO) - Maharashtra South

AICTE की अजीब ओ गरीब अपील.....

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने आज देश के सभी तकनीकी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को संदेश देकर इंडियन योग एसोसिएशन द्वारा आयोजित सामूहिक प्रार्थना  में भाग लेने का अनुरोध किया है। यह सामूहिक प्रार्थना बज़ाहिर शंकर जयंती समारोह के एक कार्यक्रम के तौर पर कोरोना महामारी की समस्या से निपटने के लिए आयोजित की जा रही है।

यह बात निहायत शर्मनाक है कि ऐसे समय में जब लोगों को बुनियादी एवं आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने और लॉकडाउन से प्रभावित लोगों की खाद्य सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए, सरकार एक धर्म विशेष की पूजा पद्धति एवं प्रथाओं को बढ़ावा देने में व्यस्त है।

 AICTE एक  नियामक संस्था है जिसकी ज़िम्मेदारी  तकनीकी शिक्षा संस्थानों के लिए मानक तय करना और  उन्हें इसकी सुविधा प्रदान करना है, ना कि कोई प्रार्थना सभा आयोजित करना है। यह केंद्र सरकार की ओर से  AICTE जैसी स्वायत्त संस्थानों को कमजोर करने और उनको हिंदुत्व के एजेंडा के लिए इस्तेमाल करने का खतरनाक प्रयास है।

उज़ैर अहमद रंग्रेज़
प्रदेश सचिव
स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) - दक्षिण महाराष्ट्र


Monday, April 20, 2020

پالگھر بے رحمانہ قتل پر ایس آئی او کا بیان

پالگھر ضلع میں چور ہونے کے شبہے میں تین افراد کا ہجوم کے ذریعے سے وحشیانہ قتل انتہائی قابل مذمت ہے۔ یہ واقعہ ایک بار پھر ملک میں تیزی سے بڑھ رہی معاشرتی خرابیوں اور لاقانونیت کو اجاگر کرتا ہے۔ یہ صورتحال ملک کے لیے انتہائی تشویشناک ہے۔ 

ایسے وقت میں جب ہمیں انسانیت کا ثبوت دیکر ایک دوسرے کے ساتھ کھڑا ہونے کی ضرورت ہے، کچھ لوگوں کے ذریعے سے اس واقعہ کو فرقہ وارانہ رنگ دینے کی کوشش نہایت شرمناک ہے۔ لوگوں کے درمیان اور حکام کے تئیں اعتماد بحال کرنے کے لیے حکومت کو ٹھوس اقدام اٹھانے چاہئے۔ 

ایس آئی او مجرموں کے خلاف کارروائی کے ساتھ ساتھ مظلوموں کے گھر والوں کو مناسب معاوضہ نیزسوشل میڈیا کے ذریعہ فیک نیوز اور فرقہ واریت پھیلانے والوں کے خلاف سخت کاروائی کا مطالبہ کرتی ہے۔

سلمان احمد
صدر حلقہ
ایس آئی او جنوبی مہاراشٹر

पालघर नृशंस हत्या पर एस आई ओ का बयान

पालघर ज़िले में भीड़ द्वारा चोर होने के शक में तीन लोगों की क्रूरतापूर्ण हत्या घोर निंदनीय कृत है। ये घटना एक बार फिर देश में समाजी बिगाड़ और अराजकता को उजागर करती है। ये परिस्थिति देश के लिए चिंता का विषय है।
ऐसे समय में जब हमें मानवता का परिचय देते हुए एक दूसरे के साथ खड़े होने की आवशयकता है, कुछ लोगों के द्वारा इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश निहायत शर्मनाक है। लोगों के बीच आपस में एवं सरकार के प्रति विश्वास बहाल करने की दिशा में सरकार को ठोस क़दम उठाना चाहिए।
एस आई ओ अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई के साथ साथ प पीड़ित परिवार वालों को उचित मुआवजे की मांग करती है। साथ ही साथ ऐसे अवसर पर सोशल मीडिया के माध्यम से झूठी खबर, अफवाह और सांप्रदायिक द्वेष फैलाने वाले पर कठोर कार्रवाई की मांग करती है।

सलमान अहमद
प्रदेश अध्यक्ष,
एस आई ओ दक्षिण महराष्ट्र

SIO's Statement on the Brutal Killings in Palghar

The brutal mob lynching of three people on the suspicion of being thieves once again highlights the breakdown of social fabric and rule of law in the country, where reason and tolerance has given way to conspiratorial mindset and prejudice and the trust on authorities has given way to vigilantism and lawlessness.

At a time when we should stand in solidarity with fellow human beings, the effort to communalize this incident by some people is equally shameful. Stringent actions should be taken against those who spread rumours and incite hate.

The state should take steps to restore mutual trust among people as well as authorities. Besides taking action against culprits, the families of the victims need to be compensated.

Salman Ahmad
Zonal President
Students Islamic Organisation of India (Maharashtra South)

Friday, February 7, 2020

ایس آئی او نے نوجوان قائد سلمان احمد کی رہائی کا کیا خیرمقدم ، حق و انصاف کی جدوجہد جاری رکھنے کا کیا عزم


اسٹوڈنٹس اسلامک آرگنائزیشن آف انڈیا (ایس آئی او) نے طلبا لیڈر اور صدر ایس آئی او جنوبی مہاراشٹر سلمان احمد  کی رہائی کا خیرمقدم کیا ہے. واضح رہے کہ جمعہ کے روز ناندیڑ پولیس  نےسلمان احمد کو ضمانت پر رہا کیا۔
 سلمان احمد پر ناندیڑ کے شاہین باغ احتجاج میں دیئے گئے شہریت ترمیمی قانون (سی اے اے) کے خلاف اپنی ایک تقریر کے کچھ حصوں کی غلط پیشکش کے سبب معاملہ درج کیا گیا تھا۔  ناندیڑ پولیس نے جمعرات کی شام ممبئی سے سلمان احمد کو تحویل میں لیا اور انھیں ناندیڑ لیکر گئے۔  سلمان احمد کو اپنے موقف کی وضاحت اور ضروری قانونی کارروائی کرنے کے بعد جمعہ کی سہ پہر اتوارہ پولیس اسٹیشن میں ضمانت مل گئی۔
 یہ غیرضروری تنازعہ میڈیا اور کچھ افراد کی بدنیتی پر مبنی کوشش اور این آر سی، سی اے اے و این پی آر کے خلاف جاری تحریک کو بدنام کرنے کی سازش کا حصہ تھا۔  تقریر میں کچھ بھی متنازعہ نہیں تھا۔  آدھے گھنٹے سے زیادہ کی تقریر کا ایک چھوٹا سا حصہ لے کر اسے فرقہ وارانہ ایجنڈے کو آگے بڑھانے کے لئے سیاق و سباق سے باہر نکال کر پیش کیا گیا۔
 ایس آئی او جلد ہی میڈیا ہاؤسز اور ان افراد کے خلاف ہتک عزت کا مقدمہ درج کرنے کے لئے قانونی عمل شروع کرے گی جنہوں نے تقریر کے مندرجات کو جان بوجھ کر توڑ مروڑ کر پیش کیا تھا۔
 ایس آئی او نے ہمیشہ قانون نافذ کرنے والے اداروں اور سرکاری حکام کے ساتھ تعاون کیا ہے اور کرتی رہے گی۔  دراصل سلمان احمد نے پہلے ہی پولیس کے سامنے پیش ہونے کا ارادہ کیا تھا اور اس کے مطابق ناندیڑ  کے لئے سفر پلان کرچکے تھے۔  تاہم  سلمان احمد کو سفر سے پہلے ہی حراست میں لےلیا گیا۔
 ان تمام رکاوٹوں کے باوجود معاشرے میں انصاف کے قیام کی جانب کام کرنے کا ایس آئی او کا عزم ہمیشہ کی طرح مستحکم ہے۔   ایس آئی او تمام جمہوری اور پر امن طریقے استعمال کرکے CAA جیسے سیاہ قوانین کا مقابلہ کرنا جاری رکھے گی۔
 تنظیم اس پورے معاملے میں مختلف افراد اور تنظیموں کی طرف سے دیئے گئے تعاون کا خیرمقدم کرتی ہے۔

SIO welcomes release of student leader Salman Ahmad, vows to continue struggle for truth and justice

Students Islamic Organisation of India (SIO) welcomes the release of Salman Ahmad, student leader and president SIO South Maharashtra, on bail by Nanded Police on Friday. 
Salman Ahmad has wrongfully been implicated due to misrepresentation of one of his speeches against discriminatory Citizenship Amendment Act (CAA), delivered at Nanded's Shaheen Bagh agitation. Nanded Police detained him in Mumbai on Thursday evening and brought him to Nanded. After Salman Ahmed explained his stand, he was granted bail at Itwara Police Station on Friday afternoon following the due legal procedure.
The unnecessary controversy was a result of a malicious attempt by a section of media and some of the individuals and to discredit the movement against CAA-NRC-NPR. There was nothing inflammatory in the speech whatsoever. A small portion of the half an hour long speech was edited and presented out of context to drive a communal agenda.
SIO will soon initiate the legal process to file defamation suit against the media houses and individuals who intentionally twisted the contents of the speech.
SIO has always cooperated with law enforcement and government authorities and will continue to do so. In fact, Salman Ahmad had already planned to surrender before the police and had accordingly made travel plans to reach Nanded. However, he was detained before the journey.
Despite the hurdles SIO's resolve to work towards establishing justice in the society remains strong as ever. It will continue to fight discriminatory laws such as CAA using all democratic and peaceful means.
The organisation welcomes the support extended by various individuals and organisations during these testing times.

Wednesday, February 5, 2020

SIO condemns illegal detention and arrest of Salman Ahmad; Demands Immediate Release and dropping of charges

SIO of India strongly condemns the illegal detention and arrest and witch-hunting of Salman Ahmad, State President, SIO Maharashtra South. Salman Ahmad is a well known student leader in Maharashtra with a stellar record of social service and active for many years on a number of students welfare and human rights concerns. He is a well regarded voice across the state. SIO of India demands his immediate release and the dropping of all charges.

Along with many others, he has been actively involved in the ongoing movement for equal citizenship. A speech given by him in Nanded in the backdrop of this movement has mischievously been taken out of context and edited to present a distorted version. Full clarification regarding the content of the speech has already been made by Salman and is available in the public domain. The media trial he was subjected to and the case registered against him is nothing more than an attempt to delegitimise and silence peaceful democratic protests against CAA-NPR-NRC. This is part of the ongoing targeting of student and youth activists across the country, and we must collectively stand against this silencing of dissent and democratic expression.

We strongly demand the immediate release and dropping of all charges against Salman Ahmed and all those protesting against CAA-NPR-NRC. We also condemn the irresponsible media trial of Salman and demand an immediate apology from the offending channels.

Wednesday, December 18, 2019

Students and Youths of The Oxford of The East on Police brutality, CAA, NRC

Known to be the Oxford of the East, Pune observed a historical rally organised by Students and Youths of Pune to condemn the act of police brutality against the students of JMI, AMU and other campuses across the country. Around three thousands students, activists and citizens gathered at Collector office on Tuesday, 17th December to protest against the act of police brutality in Jamia Millia Islamia (JMI), New Delhi, Aligarh Muslim University (AMU) and various other campuses across the country and voiced their opposition to the National Register of Citizens (NRC) and the Citizenship Amendment Act (CAA). The protest was organised by  Students and youth of Pune, a city-based collective of various organisations including Students Islamic Organisation of India (SIO), Girls Islamic Organisation of India, NSUI, AMU Alumni, JMI alumni , JNU Alumni and many more organisations led by SIO.

Participants accused the police perpetrated unprovoked violence against the innocent students who were agitating peacefully and in a democratic manner. The Police fired indiscriminately, carried out vicious attacks on campus, and committed acts of arson under full public view and the media glare. The police barged into the JMI library and beat up students indiscriminately and ruthlessly. They entered the JMI Masjid, desecrated and vandalized it and hit the students offering namaz. All this blatant violence was carried out without the permission of the University authorities. The Delhi Police detained and took many seriously injured students to a police station where they were held without any medical care for several hours. There are allegations that the police sexually assaulted female students, burnt buses and carried out these brazen attacks on students along with rogues and anti-social elements. There are reports of similar violence and vandalism carried out by the Uttar Pradesh (UP) Police on students in AMU. The agitating students also demanded that the government discontinue plans to conduct a nationwide NRC. The protesters also demanded that the CAA be revoked by the parliament.  CAA is against the spirit of India’s Constitution and is discriminatory. It proposes to grant citizenship to everyone except Muslims who have migrated to India from neighbouring countries such as Pakistan, Bangladesh and Afghanistan. This act goes against the basic idea of India as an inclusive, diverse, secular, and democratic nation envisaged by the founding fathers.
Huge participation was seen from girls and students of all campuses across the city. Protest was organised peacefully with slogans, banners posters condemning the government and seeking justice for victims. Finally delegates from the protest submitted The Memorandum to the President of India through Collector of Pune.